Logical poem

परिँदो के पर काट दिए
बाशिँदो के घर उजाड़ दिए
गरीबोँ के निवाले छिन लिए
प्यासोँ के पानी के प्याले छिन लिए
हर गरीब की कहानी है ये
हम जी जी करते गए और वो हमसे हमारा जीवन छिन गए।
भरी गर्मी मे हम खेतों मैं काम करते रहे,
हम पसीना बहाते गए, औऱ वो हमारा लहू पीते गए।
कुछ जुगाड़ लगा कर बच्चों को पढाने चले थे,
बच्चेमेहनत करते गए और वो मेहनत का फल किसी और को दे गए।
जब इतने से भी जी न भरा उनका, तो हमसे आकर बोले,
बसँत का मौसम आ गया है, तुम पौधों को पानी देना न भूलना,
हम फूलों को फलों मैं बदलने के लिए मेहनत करते गए
औऱ वो आखिर मे आकर, सूखा पेड़ पकड़ाकर , फल उठाए चल दिए।
फिर भी हम चुप बैठे , बस सब देखते रह गए,
वो घरों मे आए औऱ चाय पानी पीकर चल दिए।।

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